जाने कहां के ग्रामीणों ने शराब की दुकान न हटाने पर हनुमान जी की ही प्रतिमा को हटा कर शराबियों के लिये देने की उठायी है मांग
राजकीय पुस्तकालय और पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास खुली है शराब की दुकान
बलिया।। कासिमबाजार मवेशी अस्पताल रोड स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान या 'श्री पंचमुखी हनुमान की मूर्ति को हटाने के संबंध के स्थानीय लोगों ने सीएम योगी को पत्र भेजा है। पत्र मे श्री योगी जी को शराब की दुकान हटाने मे दिक्कत होने पर पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा को ही हटाकर गंगा जी मे विसर्जित करने और मंदिर वाली जगह को पियक्कड़ो को देने की मांग की है।
सूच्य हो कि कासिम बाजार मवेशी अस्पताल मार्ग में राजकीय इण्टर कॉलेज, राजकीय पुस्तकालय व श्री पंचमुखी हनुमान मन्दिर स्थित है। इस दुकान के बगल में विगत कुछ वर्षो से अंग्रेजी शराब की कम्पोजिट दुकान खुली हुई है जिसको हटाने के लिए शासन प्रशासन से कई बार आग्रह किया जा चुका है।अग्रेजी शराब के खुले मे बिक्री के कारण राहगीरों तथा मुहल्लवासियों को भारी जलालत का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही मुहल्लवासियों की माताएं-बहनों को श्री पंचमुखी हनुमान मन्दिर में पूजन-अर्चन करने में भी भारी असमर्थता प्रतीत हो रही है।
यह कि श्री पुचमंखी हनुमान मन्दिर के मुख्य सड़क पर शराबियों का जमवाड़ा सुबह से रात्रि तक लगा रहता है। शराबियों तथा अराजकतत्त्वों द्वारा शराब की खाली बोतलें तथा मांस-मछली के खाए गए पदार्थ सुबह-सुबह मन्दिर के राह पर पड़ा रहता है। शराबियों द्वारा इस प्रकार के पेय पदार्थ के खाली बोतलें मुहल्लेवासियों के दरवाजे पर भी फेंककर भारी आतंक किया जा रहा है। सुबह-सुबह मन्दिर में पूजन-अर्चन करने जाते समय ऐसे पेय पदार्थ को देखकर माताएं-बहनों एवं हम सभी सनातन धर्मावलम्बियों की भावनाएं आहत होती है और शाम के समय मंदिर में पूजा अर्चना एवं आरती के लिए माताएं बहने खराब माहौल के कारण मंदिर जाने में असमर्थ है।
यह कि कार्यालय आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश प्रयागराज के पत्र संख्या-8349-8423/11/ई०आई०बी०/विविध/2023-204 दिनांक प्रयागराज 13 दिसम्बर 2023 के प्राविधानानुसार बिन्दु संख्या 02 में आबकारी अनुज्ञापन की चौहददी के सम्बन्ध में नियमावली 1968 (यथासंशोधित) के सुसंगत प्रावधान निम्नलिखित निर्गत किए है--
01- किसी सार्वजनिक पूजा स्थल अथवा विद्यालय अथवा चिकित्सालय अथवा आवासिक कॉलोनी के नगर निगम में होने के मामले में 50 मीटर की दूरी के भीतर, नगरपालिका परिषद और नगर पंचायत होने के मामले में 75 मीटर की दूरी के भीतर व प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में होने के मामले में 100 मीटर की दूरी के भीतर दुकान स्थित न हो।
02- मा० सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 31.03.2017 के अनुसार नगरीय क्षेत्रों को छोड़कर जिन क्षेत्रों की आबादी 20 हजार या उससे कम हों वहाँ राष्ट्रीय/राज्य राजमार्ग के बाहरी छोर से दुकान की दूरी 220 मीटर होनी चाहिए। 20 हजार से अधिक की आबादी वाले क्षेत्रों में यह दूरी 500 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए।
आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश प्रयागराज व माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्गत आदेश के बाद भी श्री पंचमुखी हनुमान, राजकीय इण्टर कॉलेज व राजकीय पुस्तकालय के 50 मीटर के दूरी के अन्दर ही अंग्रेजी शराब की कम्पोजिट दुकान स्थापित हो चुकी है। जिससे उपरोक्त आदेश की अवहेलना होती है।
..... तो पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा को ही करा दीजिये गंगा मे विसर्जित
पत्र के अंत मे सीएम योगी से मांग की गयी है कि उपरोक्त वर्णित परिस्थतियों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन अंग्रेजी शराब की दुकान को हटाने में असमर्थ है तो इस स्थिति में श्री पंचमुखी मन्दिर को (हम सभी मुहल्लेवासियों के दुःखी मन के कारण) बन्द कर मूर्ति को विसर्जित करने हेतु सम्बन्धित को आदेशित करने का कष्ट करें। जिससे की हम सभी सनातन धर्मावलम्बियों की भावनाएं आहत न हो।
शराबियों को पीने के लिये दे दे मंदिर
मुहल्ला वासियों ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री जी से मांग की है कि अगर मंदिर की सूचिता धार्मिकता बरकरार रखने मे जिला प्रशासन को दिक्क़त आ रही हो तो श्री पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति को हटा कर जिला प्रशासन गंगा मे विसर्जित कर दे। इसके बाद मंदिर को शराबियों को बैठ कर शराब पीने के लिये आवंटित कर दे। क्योंकि शराब की दुकान के रहते मंदिर की सूचिता नहीं बचने वाली है।
नगर पालिका कंगाल, किरायेदार मालामाल
क़ासिम बाजार मवेशी अस्पताल रोड पर नगर पालिका बलिया ने चौक मे पटरियों पर दुकान लगाने वालों के लिये कटरा बनाकर दुकाने आवंटित की थी। नगर पालिका प्रत्येक दुकान का किराया मात्र रूपये 233 प्रतिमाह लेती है। लेकिन आवंटियों को तो यहां दुकान करना ही नहीं था, इस लिये इन लोगों ने इन दुकानों को खुद किराये पर मोटी रकम पर दे दिये है। जबकि एक किरायेदार को किरायेदारी पर दूसरे को दुकान देने का कोई अधिकार ही नहीं है। जिन दो दुकानों मे शराब की दुकान खुली है, उनको किरायेदार ने रूपये 30 हजार प्रति दुकान प्रतिमाह की दर से दिया है। अब आप खुद सोचिये 233 रूपये किराया लेनी वाली नगर पालिका बदहाल है और नगर पालिका के किरायेदार किस तरह से मालामाल हो रहे है।
सब से हैरान करने वाला आबकारी विभाग का क़ानून है, जिसमे उनको किराये पर ली गयी दुकान का किरायानामा चाहिए, चाहे वो कानूनन सही हो या गलत, इससे कोई मतलब नहीं है। यही नहीं यह दुकान चौक के लिये आवंटित है लेकि यह दूसरी एरिया मे खुली है, फिर भी आबकारी विभाग के अधिकारी आंखे बंद कर बैठे हुए है। किरायेदार मालामाल हो रहे है, नगर पालिका की आँखों के सामने, लेकिन धन्य है नगर पालिका और जिला प्रशासन जो इस गोरखधंधे के खिलाफ न जाने मुहिम चलाने से क्यों डर रहा है।